Sunday, July 27, 2014

मुझे भक्ति सीखा दो मीरा

मुझे भक्ति सीखा दो मीरा
मेरा दिल खाली है
अकेला है और पापी है
श्याम को इस दिल में कैसे पुकारूँ
मुझे वो युक्ति सीखा दो मीरा|

मुझे भी वो प्रेम की चाह है
जहाँ कोई नहीं बचता है
जहाँ सिर्फ़ कान्हा हैं सिर्फ़ कान्हा!
मुझे भी वहाँ ले चलो मीरा|

प्रभु को भाए एक ऐसा रूप
मुझे भी दिला दो मीरा|
तमस छूटे एक ही पल में
ऐसी प्रेमअग्नि मुझ में भी जला दो मीरा|

कान्हा-प्रिया ओ! परम सुंदरी
मीरा मीरा मीरा मीरा मीरा!
वो गाए जो गीत तुमने प्रेम के
कुछ एक मुझे भी सीखा दो मीरा!

देखो ना इतनी अकेली हो गयी मैं
कि लग गयी अब कान्हा-लत
मीरा! शुक्लहृदयानी श्यामल-मीरा!
कोई तरक़ीब तो होगी मेरे लिए भी
सिखा दो! बचा लो! हे! कान्हा-प्रिया!
मुझे भक्ति सीखा दो मीरा

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