Tuesday, July 1, 2014

लंबाई पर~


छब्बीस साल हो गये, यह चींटी अभी केवल जूँ ही चली हैं
लगता हैं यहाँ से वहाँ तक का सफ़र कुछ ज़्यादा ही लंबा है!

तब तो कुछ भी नहीं पता था और अभी भी क्या पता है!
लगता है अंजाने और जाने का यह फासला कुछ ज़्यादा ही लंबा है!

एक अरसा 'आ' में और एक अरसा 'भया' में, यह 'सा' कब आएगा?
लगता है 'अभ्यास' से 'साधना' तक का सफ़र कुछ ज़्यादा हि लंबा है!


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